श्याम अग्रहरि
दुद्धी : ग्राम प्रधान संघ के नेतृत्व में दुद्धी ब्लाक क्षेत्र के दर्जनों ग्राम प्रधान ग्राम पंचायत में बन रहे आवास ,शौचालय सहित अन्य निर्माण के लिए प्रयुक्त बालू को सस्ते दामों में उपलब्ध कराने और कनहर नदी के कोरगी, पीपरडीह बालू साईड से परमिट के माध्यम से ट्रैक्टर के द्वारा बालू उपलब्ध कराने की मांग करते हुए तहसील मुख्यालय पर आयोजित समाधान दिवस में एक शिकायती पत्र उपजिलाधिकारी शैलेन्द्र मिश्रा को सौंपा।
ग्राम प्रधान त्रिभुवन यादव, शिवकुमार यादव ग्राम प्रधान प्रतिनिधि बृजेश कुमार, बुंदेल चौबे, निरंजन जायसवाल , दिनेश यादव ,निरंजन सोनी, सुरेंद्र कुमार आदि ने बताया कि वर्तमान समय में सबसे प्रमुख समस्या बालू की ही है। सरकार के मंशा अनुरूप ग्रामीण अंचल में आवास बन रहे है, जिसमें आदिवासी का आवास बनाने के लिये काफी दबाव है। उक्त आवास के लिये जब भी कोई सम्पर्क करता है तब बालू खनन व्यवसायी की ओर स्पष्ट रूप से मना कर दिया जाता है कि लोकल ट्रैक्टर से हम बालू नहीं दे सकते |जबकि ट्रैक्टर कामर्शियल रजिस्ट्रेशन कराने के बाद बालू लेने के लिये जाते है। ट्रक से बालू खरीदने की क्षमता आवास लाभार्थियों की नहीं है। इसलिए उनका सरकारी आवास बनना कठिन हो जाता है।बालू को सस्ते दामों में उपलब्ध कराने और कनहर नदी के कोरगी, पीपरडीह बालू साईड से परमिट के माध्यम से ट्रैक्टर के द्वारा बालू उपलब्ध कराया जाए|
दुद्धी/ सोनभद्र| प्रधान संघ ने आरोप लगाया कि कोरगी व पिपरडीह बालू साइट पर तमाम प्रकार की अनियमितताए हो रही हैं, जिसमें मुख्य रूप से डब्लू0टी0 बगैर परमिट 2500/-रू0 सैकड़ के हिसाब से टीपर या हाइबा को बालू दिया जा रहा है जबकि परमीट के साथ 3500/-रू0 प्रति सैकड़ा घन फिट रेट पर बालू बेचा जा रहा है | साइटों से ज्यादातर गाड़िया डब्लू०टी० चल रही है। इसमें किसी तरह का कोई परमीट नहीं मिलता| अधिकारियों तथा सरकार के आख में धूल झोककर बालू की चोरी कर सोनभद्र जनपद के साथ - साथ बनारस तथा अन्य जगह बेखौफ लोग ले जा रहे है। जबकि आदिवासी अपने आवास हेतु या शौचालय बनाने हेतु 10-20 फीट बालू उठावें तो पकड़े जाने पर ईमानदारी से नियम व कानून का पालन करवाया जाता है तथा विभागों द्वारा लाखों रू० जुर्माना लगाया जाता है| किन्तु इस डब्लू0 टी0 बालू लोडिंग का पैसा किस राजस्व के खाते में जाता है आज तक इस बात का पता नहीं चल पाया।







