दुद्धी : काश्तकारों के खेत मे बहाया जा रहा है नालियों का गन्दा पानी, खेत मालिकों को हो रही है काफी दिक्कत

➥ 1978 से स्थापित नगर पंचायत आज भी जल निकासी की समस्या से जूझ रहा है
➥ किसी भी चेयरमैन के कार्यकाल में इस पर नहीं बनी कार्य योजना
➥ काश्तकारों के खेत मे बहाया जा रहा है नालियों का गन्दा पानी, खेत मालिकों को हो रही है काफी दिक्कत
➥ जिनके खेत मे नाली का गंदा पानी बह रहा है उन काश्तकारों की परेशानी का ख्याल किसी को नहीं
दुद्धी । नगर पंचायत दुद्धी की स्थापना फ़रवरी 1978 में इसलिए हुई थी कि इसका उत्तरोत्तर विकास होगा। मगर अपेक्षित उद्देश्यों से यह भटका दिखाई पड़ता है।
वर्ष1988 में पहला चुनाव होने पर इस नगर पंचायत के विकास का खाका खिंचा गया। इस पर पहल भी प्रारंभ हुआ। लेकिन एक भाग वह भी है जिस पर नगर पंचायत दुद्धी द्वारा कोई ध्यान नही गया।
वह एरिया है नाली के जल निकासी का। यह आज भयावक रूप में नगर पंचायत के सामने बड़ा चुनौती बन कर खड़ा है। नाली के स्थायी जल निकासी की समस्या पर नगर पंचायत दुद्धी जूझता, हाँफता प्रतीत होता है। यह समस्या इतनी विकट व विकराल हो गयी है कि इस समस्या के निवारण पर 1978 से अब तक कोई ध्यान नही दिया गया। आज नगर पंचायत में 1978 के मुकाबले जनसंख्या अधिक है और नगर का विकास भी होता रहा। विकास के क्रम में नालियों का निर्माण तो किया गया परन्तु निर्मित नाली का पानी कहाँ जायेगा इसकी मुकम्मल व्यवस्था नही की गयी।
नगर पंचायत दुद्धी पूरब में पत्ती गोदाम से लेकर पश्चिम में लौआ नदी बीडर की सीमा को स्पर्श करता हुआ लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित है। नगर पंचायत में नालियों की संरचना इस प्रकार से है कि उसका पानी कहीं बाहर न जाकर किसी न किसी काश्तकार के खेत मे जमा होकर रह रही है। माँ काली मन्दिर तिराहा से विंढमगंज की ओर जाने वाली नाली पत्ती गोदाम से आगे जाकर उत्तर तरफ देवनारायण जायसवाल व दक्षिण तरफ महेन्द्र जायसवाल के खेत मे गिरता है, उसी तरह अमवार तिराहे से खजुरी की ओर जाने वाली नाली जिसमे चौक तक का नाली का पानी आता है वो ओम प्रकाश के घर के पास, आगे नहर में व उसी तरह आगे इसी रोड पर किसी न किसी के खेत मे गिरती है।

बात महावीर मुहाल की हो तो पूरे वार्ड का पानी राणा तिवारी के घर के पास के खेत मे गिरता है। उससे आगे वार्ड 11,8 व 3 के कुछ हिस्से का नाली का पानी नरसिंह मन्दिर के पास के खेत मे गिर रहा है।
रामनगर तरफ का कुछ नाली का पानी बढनीनाला मे आकर इकट्ठा हो रहा है। इसी तरह डी सी एफ, तालाब रोड़, रामनगर रोड़, बढ़नी नाला साइड, में नालियों का पानी काश्तकारी खेत मे गिर रहा है। कहीं कहीं नाली का पानी सरकारी नाले में तो गिराया गया है लेकिन उस नाले का अस्तित्व किसी के खेत मे खत्म हो जाता है। बात अगर नाले की हो तो डी0आर0पैलेस व तालाब के पास के नाले का अस्तित्व कहाँ तक सुरक्षित है यह जांच व भौतिक सत्यापन का विषय है। उनमें छोटी छोटी नालियां तो मिल रही हैं लेकिन वह नाला आगे जाकर कहाँ दम तोड़ रहा है यह देखा जा सकता है। कुल मिलाकर सभी छोटी नालियां आगे जाकर किसी बड़े नाली में मिल जाती है। वे बड़ी नालियां आगे बढ़कर किसी खेत मे ही जमा हो रहीं हैं। काश्त के खेतों में नालियों के गिरने से वहां की जमीन प्रदूषित हो गयी है। जल जमाव होने से सदैव संक्रमित बीमारियों का खतरा बना रहता है। साथ ही काश्त की जमीन का उपयोग न के बराबर होने से काश्तकारों की समस्या और बढ़ गयी है।
इस भयंकर समस्या के निदान पर कोई भी आवश्यक कार्यवाही नगर पंचायत प्रशासन की ओर से होती दिखाई नही दी है। ऐसा भी नही है कि नगर पंचायत में बजट की कमी रही हो। सुंदरीकरण, सड़क, खड़ंजा, नाली व अन्य क्षेत्रों में निर्माण पर पैसों को ख़र्च किया गया, जहां जैसी उपयोगिता रही उस तरह के कार्य को अंजाम दिया गया लेकिन 1988 से लेकर अब तक चार चेयरमैन की योजना में नालियों के स्थायी जल निकासी का प्लान न बन पाना अपने आप मे एक अलग प्रश्न खड़ा करता है।
बता दें की 7 फरवरी 1978 में नगर पंचायत दुद्धी की स्थापना हुई और 1988 में दुद्धी नगर पंचायत के प्रथम चेयरमैन गोपाल दास जायसवाल ने कुर्सी सम्भाली तो उनकी धर्मपत्नी ने 1995 में व फिर से वर्ष 2000 में चेयरमैन की कुर्सी गोपाल दास जायसवाल को ही मिली। वर्ष 2007, 2009 व 2012 में नगर पंचायत दुद्धी के चेयरमैन की कुर्सी सुनीता देवी को मिली तो दिसम्बर 2017 नगर पंचायत दुद्धी के चेयरमैन राजकुमार अग्रहरि बने। लेकिन किसी भी चेयरमैन के कार्यकाल में स्थायी जल निकासी की मुकम्मल व्यवस्था को सुदृढ न किया जाने का मलाल आज नगर वासियों को हो रहा है।
जिसने भी नगर पंचायत का प्रतिनिधित्व किया उन्होंने इस कस्बे को सजाने,सवारने सहित निर्माण क्षेत्र में भी बहुत कार्य करने की योजनाओं को मूर्त रूप देने का प्रयास किया लेकिन आज की प्रमुख समस्या के निवारण की तरफ ध्यान न दे पाना आदर्श नगर पंचायत के आदर्श वाक्य को धूमिल करता दिखाई दे रहा है। जिन काश्तकारों के खेत मे नाली गिर रहा है उन लोगों ने नगर पंचायत प्रशासन से जल्द से जल्द इस समस्या के निवारण की मांग की है। इस विषय पर वर्तमान चेयरमैन राजकुमार अग्रहरि से बात किया गया तो उन्होंने इस बड़ी समस्या के समाधान की बात कही। उन्होंने कहा कि यह बहुत आवश्यक प्रोजेक्ट है व हमारी कार्ययोजना में भी है। शासन को इस के लिए प्रस्ताव बना कर भेजा जा रहा है। शासन से बजट व दिशा निर्देश मिलते ही इस पर कार्य प्रारंभ होने की आशा है।